हम अक्सर देखते हैं कि कुछ वाहनों के टायर अचानक फट जाते हैं, जिससे बड़े हादसे भी हो जाते हैं। वाहनों के टायर फटना भी एक आम बात है, क्योंकि कब ऐसा हादसा हो जाए कोई नहीं जानता।
लेकिन कुछ अनुमान है कि वाहनों में हवा का दबाव बहुत कम होने पर भी टायर फट जाते हैं। दूसरी ओर, यह कहा जा सकता है कि वाहन के अधिक वजन होने पर भी टायर फट जाते हैं।

ऐसे में कई लोगों को आश्चर्य होता है कि कई टन वजनी विमान के लैंड करने पर उसके टायर क्यों नहीं फटते। लेकिन इसके पीछे विज्ञान और तकनीक के कुछ ऐसे रहस्य छिपे हैं, जो ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। लेकिन आज हम आपको ये राज बता रहे हैं।
दरअसल, जब प्लेन लैंड करता है तो उसकी स्पीड 250 से 300 किमी प्रति घंटे के बीच होती है। इस समय भी टायर घर्षण और दबाव दोनों को झेल सकता है। क्योंकि ये आम गाड़ियों के टायरों से बिल्कुल अलग होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई जहाज के खास टायर रबर, एल्युमिनियम और स्टील को मिलाकर बनाए जाते हैं।
इतना ही नहीं इसमें सामान्य वाहनों के टायरों की तुलना में 6 गुना ज्यादा एयर फिलिंग भी होती है। इससे वायुयानों के टायरों में नाइट्रोजन गैस भर जाती है, जो अन्य गैसों की अपेक्षा अधिक शुष्क तथा हल्की होती है। यह तापमान से प्रभावित नहीं होता है और आग का कारण नहीं बनता है।
यह गैस ऑक्सीजन के साथ भी प्रतिक्रिया नहीं करती है इसलिए तेज गति में भी गर्म करने के बाद यह विस्फोट नहीं करती है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई जहाज में टेकऑफ और लैंडिंग के लिए 500 बार टायरों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद ग्रिप आती की जाती है। इसका मतलब है कि एक टायर में अधिकतम 7 ग्रिप फिट की जा सकती हैं।
डिसक्लेमर: यह न्यूज वेबसाइट से मिली जानकारियों के आधार पर बनाई गई है। IAS Mania अपनी तरफ से इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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